
बसंत का यह संगीत, संभाल लो आप अपने ह्रदय में,
बीत जाएगा वर्ष, भूल जाओगी तुम, वह भी जानू मैं |
आएगा फागुन, बजेगा वह सुर, रात के अंधेरे में,
छलछलाती हुई आखें, दिखोगी तुम मेरी सोच में |
नहीं रुकना है मुझे, जब ढल जाएगी बेला,
चले जाना है तब, जब खत्म होगा खेला |
लौटेगा फागुन फिर से, फिर से गुंजेगा वह दर्द,
किसी रह्गीर के गाने में, नवीन अल्फाज़ के ज़रीये |